Wednesday

अंजानी डगर पार्ट--17 - Xstoryhindi

आगे.................... अलीना का आलिंगन ही विक्की के होश उड़ाने के लिए काफ़ी था पर ये चुंबन...अफ...विक्की वाकई मे बावला हो चुका था. समझ नही पा रहा था कि अलीना की इस हरकत का क्या जवाब दे. बेचारा नया नया था ना इस लाइन मे अलीना- आर यू कमिंग ? पर शायद अलीना के लिए ये सब बिल्कुल सामान्य से बात थी. ऑस्ट्रेलिया मे तो किस करना आम बात है. ये सोच कर विक्की ने खुद को रोक लिया और उसका लंड भी काफ़ी समझदार निकला. विक्की- हा..श्योर अलीना- व्हेअर ईज़ दा लाइब्ररी ? विक्की- हियर....दिस वे... अलीना- ओह इट्स हियर....यू मेड इट सो ईज़ी फॉर मी. लेट्स गेट इन. अलीना लाइब्रेरियन के काउंटर के पास पहुचि तो वो वाहा पर नही था. उन्होने बेल बजाई तो अटेंडेंट आ गया. उसने बताया की लाइब्रेरियन की प्रिन्सिपल के साथ मीटिंग है. 15-20 मिनिट मे आ जाएँगे. यह कह कर अटेंडेंट चला गया. उसकी बात सुनकर दोनो ने एक दूसरे का मूह देखा और खिल्किलाकर हंस पड़े. फिर दोनो ने टाइम पास करने के लिए रॅक्स पर से 1-1 बुक उठा ली और रीडिंग सेक्षन की ओर चल पड़े. रीडिंग सेक्षन मे कोई नही था. वाहा पहुच कर विक्की ने अपनी बुक एक टेबल पर रखी और एक चेर को बैठने के लिए खीचा. अलीना ने भी अपनी बुक टेबल रखी पर बुक नीचे गिर पड़ी. विक्की बुक उठाता उससे पहले ही अलीना झुक गयी और विक्की को उसकी छाती पर टँगी नाश्पतियो के दर्शन हो गये. आक्षन का रिक्षन भी तुरंत हुआ. अलीना केबूब्स को देखकर तुरंत ही विक्की का लंड फिर से अंगड़ाइया लेता हुआ खड़ा हो गया. विक्की की पॅंट के आकार मे हुए इस परिवर्तन को अलीना ने भी देख लिया था. शायद इसी का तो अलीना को इंतेजार था. उसे पक्का हो गया कि विक्की अब उसकी जवानी पर मर मिटा है. अलीना- वॉट हॅपंड इन युवर पॅंट्स ? विक्की- नही नही ...कुछ भी तो नही.. विक्की सकपका गया था. जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो. पर अलीना ने उसकी पॅंट के उभार के उपर अपना हाथ रख दिया. अलीना- फिर ये क्या है...कोई प्राब्लम तो नही है या पर... विक्की- नही...ये...नही...कुछ भी तो नही.. विक्की थोड़ा पीछे हट गया और अलीना खड़ी हो कर उसकी तरफ बढ़ने लगी. अलीना- कही मुझसे तो परेशानी नही है....या मेरे कपड़ो से कुछ... विक्की- न्‍न्‍णणन् नई तो... अलीना- तो तुम मुझे से इतना दूर क्यो भाग रहे हो... अलीना की आवाज़ मे मादकता का पुट आता जा रहा था. उसने विक्की की शर्ट का कॉलर पकड़ लिया. विक्की की हालत को बयान करना मेरे बसकी नही है. बेचारा जल बिन मछली की तरह तड़प रहा था. उसे कुछ नही सूझा तो उसने अलीना के सिर को कस कर पकड़ लिया और अपने होठ उसके होंठो पर रख दिए. फिर क्या था. अलीना तो कब से इसी इंतेजार मे थी. जबरदस्त फ्रेंच किस का दौर शुरू हो गया. दोनो की जीबे एक दूसरे के मूह का मुआयना करने लगी. मदहोशी बढ़ती जा रही थी. अलीना ने विक्की के हाथ सिर से उतार कर अपनी छाती पर रख दिए और विक्की से लिपट सी गयी. अलीना की चुचिया विक्की की हथेलियो मे समा गयी. विक्की की तो जन्म-जन्मान्तर की इक्च्छा आज पूरी हो गयी थी. वो दोनो चुचियो को दबाने लगा. हाए... दोनो चुचिया टेन्निस की बॉल की तरह सख़्त थी पर दबाने मे नरम भी थी. शेप एकदम गोल था. हा साइज़ ज़रूर थोड़ा बड़ा था. पता नही कितनी देर आँखे बंद करके वो दोनो एक दूसरे की बाँहो मे लिपटे खड़े रहे और एक दूसरे के होंठो को चूस्ते रहे. थोड़ी देर बाद विक्की ने आँखे खोली और अलीना को प्यार से हिलाया पर वो टस से मस ना हुई. दोनो की जवानिया एक दूसरे मे समा जाने को बेताब हो रही थी. विक्की ने अलीना को पलट लिया और उसकी कमर को अपनी छाती से सटा लिया. अब विक्की को अलीना की चुचियो की सेवा करना आसान हो गया था. उसने एक हाथ संडो के गहरे गले मे से उसकी क्लीवेज मे सरका दिया. अलीना कुछ ना बोली...बस एक हल्की सिसकारी निकल गयी थी....पर विक्की का हाथ रुका नही. वो बढ़ता हुआ सीधे अलीना के चुचियो पर जाकर ही रुका. हाए...क्या चिकनी मलाई छाप थी. विक्की उनको दबाने से पहले पूरा हथेली मे भर कर होलो-होल सहलाने का लालच छोड़ नही पाया. अलीना के निपल एकदम कड़े हो चुके थे. जब तब दब जाते और अलीना की जान ही निकल जाती. विक्की का लंड फुल साइज़ तक फूल चुका था और जीन्स को फाड़ कर बाहर आने के लिए पूरा तैय्यार था. अलीना तो बस आँखे बंद कर के इंतेजार ही कर कर रही थी. उसने खुद ही तो जलते तवे पर हाथ रख दिया था. विक्की का दूसरा हाथ क्यो इस स्वर्गिय अनुभव से क्यो मरहूम रहता. वो भी घुस गया अलीना की संडो मे...पर नीचे से. अब अलीना की दोनो टेन्निस बॉल्स विक्की की क़ैद मे थे. विक्की के लिए अब रुकना असंभव हो रहा था. जब खरबूजा खुद काटने को तैय्यार हो तो चाकू को कहे की शरम. अलीना को ही कोई ऐतराज नही तो विक्की की भी हिम्मत बढ़ती जा रही थी. विक्की ने एक हाथ बाहर निकाल लिया और अलीना के मूह से सहलाते हुए उसकी जीन्स तक पहुच गया की तभी रीडिंग रूम तालियो और हँसी की आवाज़ो से गूँज उठा. लड़की 1- मान गये अलीना. लड़का 1- सुपर्ब. पटा लिया इसको भी तूने. लड़की 2- तू जीत गयी अलीना...ये ले तेरे 1000 रुपये. अलीना-मैने कहा था ना कि कोई लड़का मुझसे नही भाग सकता. मैं जिसे चाहू अपने कदमो मे गिरा सकती हू. लड़की3- यू आर ग्रेट अलीना. वी बो अट यू. लड़का2- हमे तो लगा कि तू ही पट गयी इस से. अलीना- इस से स्मार्ट तो हमारे नौकर है. ये तो बस मेरी शर्त का सवाल था. हा. विक्की हक्का बक्का रह गया था. उसे समझ नही आया कि वो रोए या हँसे. अलीना ने उसकी मासूमियत का मज़ाक बना दिया था वो भी पूरे कॉलेज के सामने. अलीना ने उसके दिल के साथ खेला था. बड़ी मुश्किल से उसने अपने आँसू रोके थे. उसने जब आख़िरी बार अलीना की ओर देखा तो उसकी हँसी विक्की के दिल मे काँटे की तरह चुभ गयी थी. विक्की शाम को साउत एक्स मार्केट भी नही आया था. सनडे को भी नही आया तो हम दोनो उसके घर पहुच गये. पर आंटी ने कहा कि वो कल से ही कमरे मे बंद है. तुम्हारी कोई लड़ाई तो नही हुई है. यह सुन कर हमने बहुत दरवाजा पीटा पर उसने नही खोला. मंडे को पूरे कॉलेज मे ये बात फैल चुकी थी. हर कोई विक्की को हिकारत की नज़र से देख रहा था कि कैसे अलीना ने उसको बुद्धू बनाया और वो जाल मे फँस गया. सबके साथ नीता को भी पता चल गया था. उसके बाद उसने उसने एक बार भी विक्की की ओर नही देखा था. कुछ दिन बीतने के साथ कॉलेज तो सब भूल गया पर नीता नही भूली. अलीना ने ना केवल विक्की के साथ भद्दा मज़ाक किया था बल्कि नीता को भी उस से दूर कर दिया था...शायद सदा के लिए. पहला प्यार जिंदगी भर का नासूर बन जाता है. जिंदगी भर तड़पता है. विक्की भी तड़प रहा था. उसकी अंजाने मे हुई ग़लती की इतनी बड़ी सज़ा ??? क्या समझा होगा नीता ने. बॅकिकॉलेज की उसे परवाह नही थी. उन दोनो के पनपते प्यार के अंकुर को अलीना ने बड़ी बेरहमी से कुचल दिया था. आख़िर एक दिन विक्की हमारे पास आया. हमारे कुछ बोलने से पहले ही उसकी रुलाई फुट पड़ी. उसका रोना देख कर हम दोनो भौचक्के रह गये थे. अकेला 5-7 को पीट देने वाला विक्की आख़िर किस बात से इतना टूट गया था की इस तरह बिलख रहा था. हमेशा उसने ही हमे हर मुसीबत से बचाया था. आज वो ही मुसीबत मे था. जिगरी दोस्त की आँखो मे आँसू देख कर हम दोनो की आँखे भी भर आई थी. आशु- कमीने क्या हो गया तुझे, बता तो सही. बबलू- खुद भी रो रहा है और हमे भी रुला रहा है. बताता क्यो नही की क्या हुआ है. पर वो रोता ही रहा. आशु ने एक पानी की बॉटल ली और उसको पिला कर उसका मूह धुल्वाया. इसके बाद वो थोडा संयत हुआ और अपनी आपबीती सुनने लगा. बबलू- भोंसड़ी के! अब तक कहा गंद मरा रहा था. आशु- इसको बाद मे गाली दियो...पहले उस लड़की की सोच. बबलू- उस हरम्जदि का तो खानदान चोद देंगे हम. कामिनजादि...ब*ह*न की लोदी...साली...(बाकी गलिया नही लिख रहा हू, बहुत ही गंदी थी ) आशु- उसके खानदान को क्यो बीच मे लाता है...वो खुद ही चुदेगि...वो भी हमारा विक्की ही तोड़ेगा उसकी चूत को... बबलू- केवल चूत नही...हर छेद चुदेगा उसका. आशु- हमारे दोस्त की बे-इज़्ज़ती का मज़ा तो चखना पड़ेगा ना. बबलू- अगर बदला ना लिया तो धिक्कार है हमारी दोस्ती पे............ हमारी बातो से मिली राहत विक्की के चेहरे से झलक रही थी. आत्म-ग्लानि की भावना अब प्रतिशोद की ज्वाला मे बदल चुकी थी. चाहे जो भी हो जाता पर अलीना को अब खुदा भी नही बचा सकता था. क्रमशः............................

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