Wednesday

अंजानी डगर पार्ट--4 - Xstoryhindi

आगे.................... दीपा अपने कमरे मे नही थी. बाथरूम भी खाली था. पूरा कमरा बिखरा पड़ा था. मैने सारा कमरे को साफ करके सेट कर दिया और बाहर आ गया. धीरे-धीरे शाम हो गयी. मैं खाना खाकर सोने ही जा रहा था कि दीपा के कमरे से कुछ आवाज़ आई. मैने जाकर देखा तो 2 लड़के दीपा को उठा कर उसके कमरे मे ले जा रहे थे, शायद उसके दोस्त थे. मुझे बस उनकी पीठ ही दिख रही थी. दीपा ने स्पगेटी टॉप और मिडी पहन रखी थी. मैं जैसे ही दीपा के कमरे के दरवाजे पर पहुचा, उन लड़को की हरकते देख कर ठिठक गया. उन दोनो के हाथ दीपा के छोटे से कपड़ो मे घुसे हुए थे. दीपा नशे की हालत मे भी उनके हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी पर कोई फाय्दा नही हुआ. फिर एक लड़का उसके के बूब्स को मसल्ने लगा. उनमे से एक लड़का बोला- यार पूरे रास्ते तू इसको नोचता आया है. अभी तक तेरा मन नही भरा क्या. जो करने आया है वो कर ना. दूसरा- हा यार, 2 हफ़्तो से जाल बिछा रखा था. आज मछली जाल मे फँसी है. पहला- जब से इसको क्लब मे देखा है उसी दिन ठान लिया था की इसकी चूत मे पहला लंड तो अपन ही डालेगा. दूसरा- तभी तूने इसे ड्रग्स के जाल मे फँसाया था ताकि इसकी चूत पर अपना ठप्पा लगा सके. पहला- चल बाते बहुत हो गयी. अब इसको नंगा कर. दीपा (लड़खड़ाती आवाज़ मे)- न...नही मु...झे छोड़ दो. मैं वैसी लड़की नही हू. पहला- साली क्लब मे अपने जिस्म की नुमाइश क्यो करने जाती थी. अब हमारा दिल तुझ पर आ गया तो हमारा क्या दोष. आज तो तेरी सुहागरात मनेगि, 2-2 दूलहो के साथ. फिर उन दोनो के हाथ तेज़ी से चलने लगे. दीपा ने उन्हे रोकने की हल्की सी कोशिश भी की. पर वो कहा रुकने वाले थे. 1 मिनिट बाद ही दीपा अपने बेड पर जन्मजात पड़ी थी. दीपा बेचारी नशे मे भी अपनी आबरू बचाने की कोशिश मे लगी थी. उसका एक हाथ निपल्स को छुपा रहा था और दूसरा कुँवारी चूत को. कमले की सारी ट्यूब-बल्ब चालू थे. दीपा गोरा-चितता छरहरा जिस्म एक दम संगेमरमर की तरह दमक रहा था. बेचारी कोशिश तो बहुत कर रही थी पर उसके पतले हाथ ज़्यादा कुछ नही छुपा पा रहे थे. ऐसा मादक हुस्न देख कर मेरा लंड भी भड़क गया था तो फिर उन लड़को की क्या कहु. एक लड़का दीपा के नंगे जिस्म को चाटने लगा और दूसरा उसके बूब्स को नोचने लगा. दीपा अपनी इस असहाय स्थिति को देख कर रोने लगी. अब दोनो लड़के पूरी तरह सुरूर मे आ चुके थे. उन्होने अपनी जीन्स की जीप खोल कर अपने लंड बाहर निकाल लिए. ये देख कर दीपा ने अपने दोनो हाथ अपनी चूत पर कस लिए. एक लड़के ने दीपा मे मूह पर अपना लंड टेक दिया और ज़बरदस्ती घुसाने की कोशिश करने लगा. दीपा ने कस कर अपने दाँत भींच रखे थे, पर लंड की बदबू से उसे उबकाई आने लगी और लंड को अपना रास्ता मिल गया. उधर दूसरा नीचे चूत पर ज़ोर आज़माइश कर रहा था. दूसरा- साली तेरी चूत तो फाड़ कर ही रहूँगा. तेरा ये रेप तुझे जिंदगी भर याद रहेगा. जो ड्रग्स तूने हमसे ली थी उसके बदले मे तेरी कुँवारी चूत ही तो ले रहा हू. चुप चाप हाथ हटा ले. पर दीपा आँखो मे आँसू और मूह मे लंड लिए अपना सिर हिला कर अपनी इज़्ज़त बक्शने की मिन्नते कर रही थी. उसकी आँखो मे याचना का भाव साफ दिख रहा था. पर वो दोनो तो जैसे वासना के पुतले बने हुए थे. रेप शब्द सुनते ही मेरा खून खौल गया. देल्ही मे रेप के अनेको किस्से अख़बारो मे पढ़ रखे थे. मैं ये जानता था कि रेप के बाद लड़की का जीवन किस तरह तबाह हो जाता है. अभी तक मैं उन दोनो को दीपा मेडम का दोस्त समझ रहा था. मुझे लग रहा था कि अमीर बाप की ये बिगड़ी हुई औलाद ही इन दोनो को खुद यहा बुला कर लाई है. पर माजरा समझ मे आते ही मेरी पिंदलिया फड़काने लगी. दीपा की इज़्ज़त अब मेरे हाथ मे थी. मैं चुपके से कमरे मे बेड के पास पहुच गया. अगले ही पल मेरी बाए पैर की राउंड किक दीपा की चूत पर चढ़े लड़के के मूह पर पड़ी. वो उड़ता हुआ जाकर ड्रेसिंग टेबल पर ज़ोर की आवाज़ के साथ ढेर हो गया. इस आवाज़ से दीपा के मूह पर चढ़ा हुआ दूसरा लड़का चोंक गया. वो जैसे ही पीछे देखने के लिए घुमा, मेरी बाए पैर की मंकी किक उसके थोबादे पर पड़ी. उसके मूह से खून की बौछार शुरू हो गयी. फिर मैने उसे उठा कर ज़मीन पर गिरा लिया और उसकी छाती पर चढ़ कर एक पंच उसकी नाक पर जड़ दिया. उसके के लिए इतना ही बहुत था और वो बेहोश हो गया. मैं तुरंत उठा और पहले वाले के पास पहुचा. वो बेचारा और भी बुरी हालत मे था पर होश मे था. ड्रेसिंग टेबल पूरी तरह टूट चुकी थी और उसके काँच उसके शरीर मे घुस गये थे. वो बुरी तरह काँप रहा था. इतना दर्द होने पर भी उसकी चू तक नही निकल रही थी. आशु- जान प्यारी है तो अपने दोस्त को उठा और यहा से दफ़ा हो जा. वो झटके से उठा और अकेला ही बाहर भाग गया. मैने उसे बहुत पुकारा पर वो गायब हो चुका था. मैने एक नज़र दीपा को देखा, वो बेसूध सी बड़ी थी. उसकी सुध लेने से पहले इस बेहोश पड़े लड़के को ठिकाने लगाने के लिए उसे घसीट कर ग्राउंड फ्लोर पर ले गया. इतने मे वॉचमन दौड़ता हुआ आया और बोला- अरे क्या हुआ. थोड़ी देर पहले ही तो ये दोनो दीपा बेटी के साथ आए थे. अभी एक लड़का पागलो की तरह गाड़ी से भागा तो मैं डर गया और भागता हुआ यहा आ गया. क्या हुआ ? आशु- कुछ नही. वो अपना दोस्त यही छोड़ गया है. आप इसे गेट के बाहर ले जाकर सड़क पर डाल दो. नरेश- ये मर गया क्या? आशु- नही बेहोश है. अगर होश मे रहता तो मैं इसे मार ही डालता. अब जल्दी करो. नरेश- ठीक है. नरेश ने उसे संभाल लिया और मैं वापस भगा. रात के 11 बज चुके थे. कमरे मे बेड पर दीपा वैसे ही नंगी पड़ी थी. मैने उसके कपड़े उठाकर उसे पहना दिए. पर वो छोटे से कपड़े दीपा की मदमस्त जवानी को छुपा पाने मे असमर्थ थे. दीपा नंगी से ज़्यादा इन टाइट छोटे कपड़ो मे गजब की सेक्सी लग रही थी. मैं कल की तरह बहक ना जाउ इसलिए उसके जिस्म पर एक चादर डाल दी. फिर ड्रेसस्सिंग टेबल के काँच समेटने लगा. साफ सफाई करके दीपा के उतारे गये कपड़ो को बाथरूम मे रखने गया तो वाहा पर एक इंजेक्षन और एक बॉटल बाथटब के स्लॅब पर पड़ी देखी. मैने दोनो चीज़ उठा ली और साथ वाले कमरे मे सोने चल दिया. सुबह के लगभग 11 बजे मेरी नींद खुली. शायद कल के काम की थकान के कारण. मैं जल्दी फ्रेश होकर दीपा के रूम मे पहुचा. वाहा बेड पर कोई नही था. बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर बाद दीपा टवल मे लिपटी हुई बाहर निकली. उसे ऐसी हालत मे देख मैं बाहर जाने लगा. दीपा- रूको. आशु- जी. दीपा- कौन हो तुम ? दीपा की आवाज़ एकदम सुरीली थी और खनकदार भी थी. आशु- जी मैं यहा का केर..ट... नया मॅनेजर हू. दीपा- ओह...फिर तो ठीक है आशु- आप कुछ लेना पसंद करेंगी ? कोई जवाब ना पाकर मैं वापस जाने के लिए मूड गया. दीपा- अरे रूको, मेरी बात पूरी नही हुई है. मैं कुछ कहना चाहती हू. आशु- जी, कहिए. दीपा- कल रात की हेल्प के लिए थॅंक्स बोलना था. दीपा चहकति हुई बोली. पर उसके तेवर देख कर मैं गुस्से से भर गया. दीपा को अब भी अपनी ग़लती का पछतावा नही था. मैं बिना दीपा की ओर देखे हुए ही बोला- आप थॅंक्स तो ऐसे बोल रही है जैसे आपके लिए ये रोज की बात है, क्यो ? दीपा ऐसे तीखे जवाब के लिए तयार नही थी. पर वो कुछ ना बोली. आशु- जब आपने ही खुद को उन भेड़ियो के सामने परोस दिया तो इसमे उनका क्या दोष. इस बार तो मैने बचा लिया पर अगर वो ज़्यादा होते तो क्या होता... मैं दीपा को झाड़ता जा रहा था और दीपा छोटे बच्चे की तरह चुप चाप डाँट खा रही थी. 2 मिनिट तक डाँट खाकर वो धीरे से बोली- आइ..एम..सॉरी. ये सुन कर मैं दीपा की ओर मुड़ा. इसी बीच जाने कब दीपा के जिस्म पर बँधा हुआ टवल खिसक गया और दीपा एकदम निर्वस्त्रा हो चुकी थी. अब वो मेरे सामने एक दम नंगी खड़ी थी और टवल उसकी टाँगो मे पड़ा था. डाँट खाने मे व्यस्त दीपा को शायद इसका पता नही चल पाया था, पर मैं इसे दीपा की जानबूझ कर की हुई हरकत समझ बैठा. मेरा पारा और चढ़ गया. मैं कड़क आवाज़ मे बोला- डॉन'ट से सॉरी इफ़ यू आर नोट सॉरी. ये कह कर मैं कमरे से बाहर निकल गया. मेरे इस व्यवहार से भौचक्की दीपा कमरे के गेट की ओर एकटक देखती रही. उसे समझ नही आ रहा था की सॉरी बोलने के बाद मेरा गुस्सा क्यो बढ़ गया था. फिर हार कर जैसे ही आगे कदम बदाया तो उसकी टाँगो तक पहुच चुके टवल से वो लड़खड़ा गयी. अब उसे अपने नंगेपन का अहसास हुआ और मेरे गुस्से का कारण भी समझ आ गया. क्रमशः...........

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