अंजानी डगर पार्ट--9 - Xstoryhindi

आगे.................... थोड़ी देर बाद फोन की बेल बजी. काउंटर वाली लड़की- हेलो.....गुड मॉर्निंग मॅम.....जी....एक आदमी आया है.....टेलर के काम के लिए....जी श्याम प्लेसमेंट एजेन्सी से...जी ठीक है. लड़की- सुनो...तुम्हारा नाम क्या है. बबलू- जी बबलू. लड़की- मेडम तो आज आएँगी नही. तुम्हे अपायंट करने से पहले 2-3 दिन ट्राइ पर रखेंगे. उसके बाद ही बाकी बाते फाइनल होंगी. बबलू- जी. लड़की- उपर मास्टर जी से जाकर मिल लो. सीढ़िया उधर है. बाबबलू- उनसे क्या कहु कि किसने भेजा है ? लड़की- उनसे कहना निशा ने भेजा है. बबलू- आपका नाम निशा है. लड़की- क्यो कोई दिक्कत है. बबलू- न..नही. फिर बबलू चुप-चाप निशा के बताई सीढ़ियो से उपर फर्स्ट फ्लोर पर पहुच गया. उपर चढ़ते ही सामने एक रूम दिखाई दिया. कमरे मे 3 स्विंग मशीन रखी थी. उनमे से एक मशीन पर एक 50-55 साल का आदमी कम कर रहा था. वाहा 2 ट्राइ रूम भी बने हुए थे. बबलू- मस्टेरज़ी नमस्ते मस्टेरज़ी- हा नमस्ते. बोलो क्या काम है. बबलू- मैं टेलर के काम के लिए आया हू. मुझे निशा मेडम ने आपके पास भेजा है. मस्टेरज़ी- अच्छा. चलो कोई तो आया. मैं अकेला परेशान हो गया था. बबलू- तो आप अकेले यहा पर काम करते है. और कोई नही है ? मस्टेरज़ी- अरे बेटा आज कल के लड़के दर्जी का काम तो जानते नही है और आ जाते है कैंची चलाने. तुम्हे भी काम आता है या नये रंगरूट हो. पहले कभी काम किया है. बबलू- जी मैने पहले कही काम तो नही किया है. पर आपका सिर पर हाथ होगा तो जल्दी सीख जाउन्गा. मस्टेरज़ी- बेटा कोई हुनर किसी के सिखाने से नही आता. ये तो अपनी काबिलियत पर होता है. दिल लगा कर सीखेगा तो जल्दी उस्ताद बन जाएगा. बबलू- जी मैं पूरी लगन से सीखूंगा. मस्टेरज़ी- देखो असली टेलर वही जो एक बार मे ही एकदम सही फिटिंग के कपड़े सिले. बबलू- जी मस्टेरज़ी- सही फिटिंग के लिए सही नाप लेना बहुत ज़रूरी है. असली ग़लती इसी मे ही होती है. बबलू- जी मस्टेरज़ी- जाओ नीचे से किसी को बुला कर लाओ. बबलू- जी बबलू नीचे जाकर निशा से बोला- जी वो मस्टेरज़ी ने किसी को उपर भेजने के लिए कहा है. निशा- क्यो क्या काम है. बबलू- वो तो पता नही. निशा ने इंटरकम से मस्टेरज़ी के पास फोन मिलाया. निशा- मस्टेरज़ी... किस को बुलाया है. मस्टेरज़ी- अरे कुछ नही... इस नये लड़के को थोड़ी सी ट्रैनिंग देनी थी. निशा- लड़की के साथ ? मस्टेरज़ी- तो क्या मैं खुद का नाप लेना सिखाउ. लॅडीस टेलर है तो किसी लेडी का ही नाप लेगा ना. निशा- ओके इतना भड़कते क्यो हो. किसे भेजू दू. मस्टेरज़ी- तूमम्म्म....ऐसा करो रश्मि को भेज दो. वही ठीक रहेगी. निशा- वही क्यो. मैं आ जाती हू. मस्टेरज़ी- ना बाबा तू रहने दे. तू उसे ही भेज दे. निशा- जैसी आपकी मर्ज़ी. फोन रखकर... निशा- रश्मि उपर जा...मस्टेरज़ी ने बुलाया है. तुम भी उपर जाओ....बबलू. बबलू ने बाकी लड़कियो की तरफ देखा कि कौन जाएगी. रॅक वाली लड़कियो मे से एक बबलू के पास आई और बोली- चलो. बाकी लड़किया भी बबलू की तरफ ही देख रही थी. एक साथ इतनी लड़कियो की अटेन्षन पाकर वो सकपका गया और नज़रे फेर ली. रश्मि आगे चल रही थी और बबलू उसके पीछे था. रश्मि का जिस्म मांसल था. चेहरा ज़्यादा आकर्षक नही था पर रंग सॉफ था. उसकी देह मे बूब्स और कुल्हो पर काफ़ी माँस था. पर उसकी कमर पतली ही थी. चेहरा अटरॅक्टिव होता तो शायद कयामत ढाती. इसी ध्यान मे मगन कब बबलू कब मस्टेरज़ी के पास पहुच गया पता ही नही चला. रश्मि- जी मस्टेरज़ी. कहिए क्या काम है ? मस्टेरज़ी- अरे. निशा ज़रा इसको लॅडीस का सही से नाप लेना सीखना है. तू ज़रा इधर आकर खड़ी हो जा. रश्मि - जी. मस्टेरज़ी- अरे हीरो. तू भी इधर आ जा. बबलू- जी. अब बबलू और मस्टेरज़ी रश्मि के सामने खड़े थे. मस्टेरज़ी ने इंचीटेप उठा लिया. मस्टेरज़ी- पहले कभी किसी का नाप लिया है. बबलू- जी वो कोर्स मे तो नाप लिखा हुआ मिलता था. उसी के हिसाब से कटिंग करके सिल्ना होता था. मैने कभी किसी का नाप नही लिया. मस्टेरज़ी- मुझे पता था. कभी कोई डिप्लोमा-डिग्री से भी कोई हुनर आता है क्या. असल जिंदगी की सच्चाई तो अब पता चलेगी. बबलू- जी. मस्टेरज़ी- चलो आज ब्लाउस से शुरुआत करते है. देखो सबसे पहले लंबाई का नाप लेते है. उसके बाद छाती और कमर का. चलो तुम लेकर दिखाओ. यह सुन कर रश्मि अपना सूट निकालने लगी. बबलू- अरे, आप ये क्या कर रही हो. मस्टेरज़ी- तो तू नाप कैसे लेगा बेटा. बबलू- जी नाप लेने के लिए कपड़े निकालने की क्या ज़रूरत है. उपर से ही ले लेता. मस्टेरज़ी- साले सब कुछ उपर से कर लेता है क्या ? इन कपड़ो के उपर थोड़े ही पहनने है, जो तू इन कपड़ो का नाप लेगा. शरीर का नाप लेना है और सही नाप लेने के लिए अंडर-गारमेंट्स मे ही नाप लेना चाहिए. बबलू- जी समझ गया. अब तक रश्मि अपना सूट उतार चुकी थी. उसके उपरी शरीर पर केवल एक ब्रा ही थी. उसके बूब्स की हालत देख कर सॉफ पता चल रहा था कि ब्रा कुछ ज़्यादा ही छोटी थी. मस्टेरज़ी- बेटा ये क्या है. रश्मि- मस्टेरज़ी, क्या करू पता नही दोनो कैसे अपने-आप ही बड़े होते जा रहे है. मस्टेरज़ी- लगता रोज इनकी खूब सेवा होती है. रश्मि (शरमाते हुए)- क्या मस्टेरज़ी आप भी ना. मस्टेरज़ी- अब बड़े हो रहे है तो क्या हुआ. ब्रा तो मम्मो के साइज़ के हिसाब से ही पहनेगी. देख बेचारो की क्या हालत हो गयी है. कुछ तो इनकी कदर किया कर. रश्मि- मस्टेरज़ी, अभी तो ये दोनो निगोडे मेरी छोटी साइज़ की ब्रा मे जैसे तैसे काबू मे रहते है. अगर बड़ी ब्रा पहनी तो फिर इनका साइज़ जग-जाहिर हो जाएगा. मस्टेरज़ी- तो क्या हुआ पगली. इन्ही पर तो हर मर्द मरता है. जा उधर जाकर ड्रॉयर मे से अपने साइज़ की ब्रा पहन ले. रश्मि- पर मस्टेरज़ी मुझे तो अपनी ब्रा का साइज़ ही नही पता है. मस्टेरज़ी- ऑफ..हो. ये भी मैं ही बताउ. यहा आने वाली हर औरत को मैं ही उनसी ब्रा का सही साइज़ बताता हू. रश्मि- हा मस्टेरज़ी. पिछली बार भी तो आपने ही बताया था मुझे. मस्टेरज़ी- वही तो मैं सोच रहा था की 3 महीनो मे ये नाषपाती से खबूजे कैसे बन गये. रश्मि- मस्टेरज़ी प्लीज़...बार-बार मत छेड़ो ना. मस्टेरज़ी- चल ठीक है. उतार दे इसको. शायद ब्रा के साइज़ के चक्कर मे दोनो बबलू को भूल गये थे. रश्मि की ब्रा को फाड़ कर बाहर निकलने को आतुर मम्मो को देख कर बबलू उत्तेजित हो रहा था. लंड तन कर एक दम सख़्त हो चुका था. रश्मि ने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया. दोनो कबूतर आज़ाद होकर फुदकने लगे. वाकई मे रश्मि के मम्मो ने कहर ढा दिया था. एक पल को लगा की बबलू की साँसे रुक सी गयी हो. उसकी नज़रे रश्मि के निप्पलो पर गढ़ सी गयी थी. मस्टेरज़ी- तेरा साइज़ तो एकदम मस्त हो गया छोरी. ब्रा मे तो असली साइज़ का पता ही नही चल रहा था. ये इतने बड़े हो गये है फिर भी एक दम तने हुए है. क्या राज छुपा रखा है. रश्मि- मस्टेरज़ी मैं डेली ब्रेस्ट टोनर गेल लगाती हू. उसी का कमाल है. मस्टेरज़ी- ह्म्‍म्म...हा आज कल तो कई तरीके है. हमारे समय मे तो बस मालिश ही करते थे. रश्मि- आपने तो मस्टेरनिजी की खूब मालिश की होगी. खूब मोटे होंगे उनके मम्मे. मस्टेरज़ी- उसके मम्मो की बात मत कर. चल सीधी खड़ी हो जा. बबलू का मन कर रहा था कि काश मस्टेरज़ी की जगह उसके हाथ रश्मि के बूब्स का नाप ले रहे होते. पर वो मन मसोस कर खड़ा रह गया. मस्टेरज़ी ने इंक्फिटेप उठाया और रश्मि के बाए बूब की जड़ पर लपेट दिया और फिर दाए का नाप लिया और पॅड पर लिख दिया. फिर उन्होने कमर से लेकर मम्मो तक टेप को लपेटा और लिख लिया. मस्टेरज़ी- पूरे 36 के हो गये है तेरे कबूतर. फिर उन्होने कंधे से निपल तक का नाप लिया और बोले- तू वाहा से 36फ साइज़ की ब्रा लेले. रश्मि ड्रॉयर तक गयी और ब्रा देखने लगी. फिर एक लेकर वापस मस्टेरज़ी के पास आ गयी. रश्मि-ये वाली ठीक लगती है. मस्टेरज़ी- चल पहन ले पर कल तक वापस ला दियो. फिर मस्टेरज़ी ने बबलू की ओर देखा. बबलू जड़ हो चुका था. रश्मि के कबूतरो ने उसके होश उड़ा दिए थे. उसका लंड ने पॅंट मे ही तंबू गाड़ कर आंदोलन कर रखा था. मस्टेरज़ी- क्या हुआ बच्चू ? ये तो रोज होता है यहा. अगर तू ऐसे ही तंबू गाढ कर खड़ा हो जाएगा तो काम क्या तेरा बाप करेगा. साले रश्मि की तो कोई बात नही. पर किसी कस्टमर ने तेरा ये लंड इस हालत मे देख लिया तो तेरी खैर नही बेटा. बबलू- स...सॉरी मस्टेरज़ी. रश्मि- मस्टेरज़ी अबी नया नया है. मुंबई की हवा अभी लगी नही है. बेचारे का इतना सा ट्रेलर देख कर ये हाल हो गया, पूरी फिल्म देखेगा ओ पता नही क्या होगा. रश्मि की बात सुनकर बबलू का चेहरा शरम से लाल हो गया था. तभी फोन की घंटी बजी. मस्टेरज़ी- बोल निशा...रुक मैं ही नीचे आता हू. (फोन रखकर) रश्मि मैं 10 मिनिट मे आता हू. तू इसको नाप लेने की प्रॅक्टीस करा देना. और बबलू तू रश्मि के ब्रेस्ट, वेस्ट, लेंग्थ, और शोल्डर का नाप लेने की प्रॅक्टीस कर लेना. मैं आकर चेक करूँगा. क्रमशः........

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