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asha ki samuhik chudai new stories - xstoryhindi आशा की सामूहिक चुदाई भाग - 1अपनी कहानी सुनाती हूँ..

आशा की सामूहिक चुदाई भाग - 1

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम आशा है. में एक गोरी खुबसूरत लड़की हूँ और मेरी उम्र 25 साल है.. मेरे फिगर का साईज 34-30-32 है. दोस्तों मेरे बूब्स कुछ ज़्यादा उभरे हुए तो नहीं है.. लेकिन मेरे गोरे रंग पर मेरे बूब्स क़यामत ढाते है और ऐसा मुझसे मेरी सहेलियां कहती थी और बाद में मुझे भी लगा कि जो भी मुझे देखता है वो मेरे बूब्स पर से नज़र ही नहीं हटाता है. दोस्तों चलो अब में आप लोगों को अपनी कहानी सुनाती हूँ..
यह बात लगभग 6 साल पहले की है.. वैसे तो में एकदम बिंदास रहने वाली मनचली लड़की हूँ और में बहुत सुंदर हूँ और इस लिए मेरा अंदाज़ सभी लोगों को बहुत अच्छा लगटा था. किसी से भी मज़ाक करना, कुछ भी कह देना.. यह सब चलता रहता था.

फिर उन दिनों मेरे मकान में मेरे पापा ने एक किराएदार रखा हुआ था.. जिसका नाम राहुल था और वो उस समय अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था और उसके साथ उसका एक दोस्त भी था.. जिसका नाम अमित था. तो धीरे धीरे बातें करते करते मेरी उन दोनों से अच्छी ख़ासी दोस्ती हो गई थी.. लेकिन में नहीं जानती थी कि वो मेरे बारे में क्या सोचते है..
में यह बात ज़रूर जानती थी कि वो दोनों मुझे पसंद करते थे और अब में जवान भी जो चुकी थी तो मेरे अंदर भी जवानी का एक खुमार था और उमंग थी. तो वो दोनों भी मेरी जवानी की इस इच्छा को पूरा करना चाहते थे और तभी वो दोनों यहाँ वहाँ हमेशा मुझसे बात करने का मौका देखते रहते थे.. लेकिन अब यह बातचीत कुछ और ही रंग लेने लगी थी.
तो अमित अब मुझे हर बार किसी ना किसी मौके से छूने की कोशिश करता था और राहुल मेरे बूब्स को देखता और कभी कभी मुझे आँख भी मार देता और अब यह सब अटखेलियां मेरे लिए आम होने लगी थी और अब यह सब बात बहुत आगे बड़ने लगी थी. तो एक दिन में अपने कुछ कपड़े छत पर सूखाने के लिए गई तो मैंने देखा कि वहाँ पर राहुल बैठा हुआ धुप में पड़ाई कर रहा था..
क्योंकि वो सर्दियों के दिन थे और एकदम कड़क वाली धूप निकली हुई थी.. मैंने उसकी और ध्यान दिए बिना अपने कपड़े डाले और एक चुन्नी को उसकी और करके झटक दिया तो पानी की कुछ बूंदे उसके ऊपर फिर गई और मैंने कहा कि ओह सॉरी मैंने आपको नहीं देखा और मैंने बहाना बना दिया.. लेकिन वो इसका बदला लेने को तैयार हो गया और में जैसे ही अपने और कपड़े उठाने के लिए झुकी तो उसने मेरी गांड को अपने हाथों से सहलाकर उसे दबा दिया.
मेरे तो जैसे पूरे शरीर में एकदम बिजली सी दौड़ गई.. हे भगवान यह क्या नई हरकत की उसने. मैंने सलवार और कुरती डाली हुई थी.. में एकदम उछल सी गई और सीधी खड़ी हो गई और में कुछ गुस्से का मूड बना पाती तब तक उसका एक हाथ मेरी बाहों के नीचे से निकलकर मेरे बूब्स तक जा चुका था और उसने मेरे दाई और के बूब्स को अपने दाहिने हाथ में भर लिया और दबा दिया और यह काम तो वो पहले भी कई बार कर चुका था और मुझे भी उसका मेरे बूब्स को दबाना अच्छा लगता था
और में उसके ऐसा करने पर कुछ नहीं कहती थी.. लेकिन आज का एहसास बिल्कुल अलग सा था और जब उसने जैसे ही मुझे पकड़ा तो मेरी पीठ उसकी छाती से चिपकी हुई थी और अब मैंने महसूस किया कि उसका लंड भी एकदम तनकर खड़ा हुआ था और उसका लंड मेरी गांड पर हल्का सा छू रह था. तो में एकदम सकपका गई थी और में उसे कुछ कहना चाहती थी.. लेकिन में कुछ कह ही नहीं पाई.. शायद यह एहसास मुझे भी अच्छा लग गया था.
तभी वहाँ पर अमित भी पहुँच गया और इससे पहले कि कुछ और बात आगे बड़ती.. दोस्तों में उस समय तो वहाँ से निकल आई.. लेकिन मुझे वो एहसास पागल करने लगा था. मेरे दिल और दिमाग़ पर उस एहसास का नशा सा छाने लगा था और अब मेरे मस्तिष्क में सिर्फ़ और सिर्फ़ राहुल के वो स्पर्श घूम रहे थे और में अब उस दिन का इंतज़ार करने लगी
जिस दिन में और राहुल अकेले मिलें और शायद इससे भी ज़्यादा कुछ और करें. में जवान थी और में जानती तो थी कि अब मुझे क्या चाहिए और अब में लगातार इसी मौके की तलाश में थी.. लेकिन यह मौका मेरी पूरी ज़िंदगी बदल देगा.. यह मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था और एक दिन मुझे वो मौका मिल ही गया.
दोस्तों उस मेरे पापा को एक ऑफिस के काम से एक हफ्ते के लिए बाहर जाना पड़ा और अब पापा को गए हुए दो दिन ही हुए थे कि मेरी मौसी की बहुत तबीयत खराब हो गई. तो मेरी मम्मी मुझे और मेरे छोटे भाई को छोड़कर मौसी को देखने बनारस चली गई और वो दो दिनों के लिए गई थी.
मेरा छोटा भाई उस समय 5वीं में था और उसकी परीक्षा सर पर थी.. इसलिए हम सब तो वहाँ पर नहीं जा सकते थे.. या यह कहे कि कैसे भी हो मुझे यह मौका मिल गया था. तो मैंने तुरंत यह बात राहुल को बता दी क्योंकि में यह देखना चाहती थी कि वो भी इस मौके का फायदा उठाता है या नहीं और मेरे अनुमान के अनुसार ही उसने काम किया..
जब मेरा छोटा भाई निखिल स्कूल गया हुआ था.. तो वो नीचे मेरे कमरे में आ गया और मुझसे इधर उधर की बातें करने लगा और अब में उसका इरादा समझ गई थी और में उठकर किचन में चाय बनाने गई और मैंने उससे कहा कि क्या चाय पियोगे राहुल. वो बोला कि हाँ क्यों नहीं.. तुम्हारे हाथों से तो में ज़हर भी खुशी खुशी पी सकता हूँ और यह कहते कहते वो मेरे पीछे पीछे किचन में ही आ गया और में चाय बनाते बनाते उससे बातें करने लगी..
उसके सर पर मुझे छूने और बहुत कुछ करने का भूत सवार था और वैसे वो बिल्कुल मेरे प्लान के हिसाब से ही चल रहा था. फिर वो किचन में आते ही मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया.. मैंने एक कुरती और सलवार पहनी हुई थी.. लेकिन वो कुरती कुछ तंग थी जिससे मेरे जिस्म का हर एक हिस्सा उभरकर दिखाई दे रहा था. मैंने एक चालाकी और की थी.. मैंने उस समय अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी..
जिससे मेरी गुलाबी कुरती से मेरे बूब्स के उभार से मेरे निप्पल भी साफ साफ दिख रहे थे. उसने मुझे पीछे से आकर कंधो के पास से छुआ और वो अपनी छाती को मेरी पीठ से एकदम सटाकर खड़ा हो गया और उसका खड़ा हुआ लंड पेंट में छेद करके बाहर आ जाने के लिए बेकरार हो रहा था और में उसके लंड को अपनी गांड के बीच महसूस कर सकती थी और अब मेरी आँखें बंद सी होने लगी और मैंने अपनी सहमती जताने के लिए अपनी गांड को थोड़ा पीछे किया.. जिससे उसका लंड बिल्कुल मेरी गांड के बीच में आ गया.
में अब एकदम उमंग से भर गई और राहुल ने मुझे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और थोड़ी देर वो मुझसे ऐसे ही लिपटा रहा. मैंने गैस का चूल्हा बंद कर दिया था.. क्योंकि अब दूसरा काम शुरू होने वाला था और में पीछे मुड़ना चाहती थी.. लेकिन राहुल मुझे मुड़ने नहीं दे रहा था और उसने मेरी बाहों को पीछे से ही सहलाते हुए मेरी गर्दन पर किस किया. में अपनी आँखो को बंद किये सारे अहसासों को महसूस कर रही थी.
दोस्तों मेरे मनोभाव की आप कल्पना नहीं कर सकते. में पूरी तरह से कामुकता में ग्रसित हो गई थी और अब वो अपने हाथों को मेरी कुरती के अंदर डालकर मेरे बूब्स को दबाना चाह रहा था. तो मैंने अपनी कुरती को उतार दिया.. मेरे दोनों बूब्स अब उसके लिए आज़ाद हो गए थे और आज पहली बार मैंने अपनी कुरती किसी मर्द के सामने उतारी थी.
वो मेरे बूब्स को पीछे से मेरी बाहों के नीचे से हाथ डालकर दबाने लगा और मुझे ऐसा लगा कि इसका सीधा संबंध मेरी चूत से है.. क्योंकि ऐसा करते ही मेरी चूत पानी छोड़ने को तैयार हो गई और पूरी चूत एकदम गीली होने लगी थी और अब में राहुल के आगोश में समा जाना चाह रही थी..
तभी मुझे अहसास हुआ कि उसने मेरी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया था और अब में पूरी तरह से नंगी हो गई थी. मेरी गोरी कुंवारी चूत पर उसने पहले अपना हाथ लगाया और फिर मुझे सीधा करके ऊपर बैठा दिया. वो नीचे झुक गया और गौर से मेरी चूत को देखने लगा. में ऊपर सिर्फ़ थोड़ा सा टिकी हुई थी.

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