आशा की सामूहिक चुदाई भाग - 3 || new stories - xstoryhindi

मैंने भी अपने घुटनों पर बैठकर उन तीनो के लंड को बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया.. लेकिन उनके लंड से अजीब सी स्मेल आ रही थी और में जब भी अपनी जीभ उनके लंड के सुपाड़े पर लगाती तो उनके लंड और भी खड़े और भी मोटे हो जाते और में हाथों से सहलाते हुए चूसने लगी. मुझे अब लंड चूसने में भी मज़ा आ रहा था और वो लंड के नीचे की लटकती हुई क्या मज़ेदार चीज होती है?
में तो उसे हाथों से मसलते हुए लंड को चूसने लगी और उन तीनों के मुहं से सिर्फ़ अह्ह्ह उह्ह और ज़ोर से चूसो प्लीज और ज़ोर से अह्ह्ह आवाज़ें निकलने लगी. फिर उन लोगों ने मुझे खड़ा किया और मेरे बूब्स पर अमित और उसका दोस्त टूट पड़े और राहुल मेरी चूत के निकट ही बैठ गया और वो मेरी चूत को चूसने लगा और अब मेरी आँखो से मुझे कुछ नहीं देखाई दे रहा था..


बस में यह समझ रही थी कि तीन मर्द मुझे प्यार कर रहे थे और मेरे हर एक अंग पर चुंबनो की बारिश हो रही थी. तब अमित अपने बेड के किनारे पर बैठ गया और अपने लंड को थूक लगाकर चुदाई के लिए तैयार करने लगा.
राहुल मुझसे बोला कि चल आशा अब अमित के लंड के मज़ा ले लो.. मैंने उसकी और मुस्कुराकर देखा और अमित के पास चली गई और अमित की कमर के दोनों और अपने घुटने रखकर उसकी छाती पर हाथ रखकर उसके खड़े तैयार लंड पर बैठ गई और लंड को मैंने अपने हाथों से अपनी चूत के मुहं पर रखा और मैंने अपनी चूत के होंठो को अपनी दो उंगलियों से खोला और लंड पर बैठती चली गई.. अमित ज़्यादा बलशाली था. उसने एक धक्का अपनी कमर को उठाकर मारा तो मेरी चूत को तो ऐसा लगा कि जैसे एक मोटा डंडा मेरी चूत में घुस गया हो.
तो मैंने आह भरी और उसके लंड को पूरा अपने अंदर समा लिया.. लेकिन अमित का लंड राहुल से बहुत बड़ा था.. क्योंकि में उसके लंड को अपने गर्भ की दीवार से छूता हुआ महसूस कर रही थी. तभी मुझे पीछे से कुछ हरकत महसूस हुई और मैंने देखा कि अमित के दोस्त ने मेरी गांड पर तेल लगाकर अपने लंड पर भी तेल लगा लिया है. तो में समझ गई कि अभी देखी गई फिल्म के सारे आसान मुझ पर ही ट्राई किय जाने वाले थे..
उसने अपने लंड को मेरी गांड पर टिकाया और मेरे दोनों चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़कर हल्का सा फैलाया और धक्का मार दिया आआआउऊइईईईई माँ मरी और उसका पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था और में मुहं खोलकर आहें भर रही थी. तभी राहुल बेड पर खड़ा होकर आ गया
उसने अमित के कंधो के आसपास अपने पैर रखे और मेरे मुहं के पास अपने लंड को ले आया. मैंने उसको चूसना शुरू कर दिया और अब मेरे तीनों छेद भर गए थे और मेरी चूत में अमित का लंड घुसा हुआ था और मेरी गांड में अमित के दोस्त ने अपना लंड घुसा रखा था और मेरे मुहं में राहुल का लंड घुस गया था. अब अमित और उसके दोस्त ने मुझे चोदना भी शुरू कर दिया था..
यह अहसास गजब का था क्योंकि मेरी चुदाई बहुत अच्छे तरीके से हो रही थी.. उसका दोस्त मेरे बूब्स को पकड़कर मेरी गांड में धक्के मार रहा था और अमित नीचे लेटा हुआ अपनी कमर को मटकाते हुए मेरी चुदाई कर रहा था और राहुल के लंड को में चूस ही रही थी और राहुल ने मेरे सर के बालों को पकड़कर मेरे मुहं में अपने लंड को दबा दिया और मेरा पूरा मुहं लंड से भर गया..
मुझसे साँस भी नहीं ली जा रही थी.. लेकिन मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा था. मुझे वो तीनों लोग बिल्कुल किसी पॉर्न फिल्म की तरह चोद रहे थे.. में पूरी तरह से चुदाई के मूड में थी और मेरी जमकर चुदाई हो रही थी फिर राहुल ने अपने लंड को मेरे मुहं से बाहर निकाला और अमित के दोस्त को हटाकर मेरी गांड मारने राहुल आ गया..
उसने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर लगाया और हल्का सा धक्का दिया और उसका लंड बड़ी ही आसानी से मेरी गांड में घुसता चला गया. अमित का दोस्त जिसका नाम रशीद था वो मेरे मुहं में अपने लंड को घुसाने आ गया था और मैंने भी उसको बड़े प्यार से देखा और उसके लंड को अपनी जीभ से चाटते हुए चूसने लगी. उसके लंड का स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था और में उसको बहुत आनंद देना चाह रही थी.
फिर राहुल ने भी मेरी गांड पर धक्के मारने शुरू कर दिया और अमित नीचे से धक्के पर धक्के लगाए जा रहा था. फिर हम लोग झड़ गए और हमारी पोज़िशन बदल गई. दोस्तों में कभी किसी के साथ लेटती तो कभी किसी के साथ.. में बारी बारी से सबसे चुदाई करवा रही थी और मैंने वो सारी रात उनके कमरे पर ही बिता दी.
फिर सुबह 4 बजे में नीचे आई मेरी चूत और गांड दोनों दर्द करने लगी थी.. लेकिन अभी भी मेरी भूख कम नहीं हुई थी और राहुल ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर मुझे अच्छी तरह से चोदा था. मुझे तो यह भी याद नहीं था कि में किससे कितनी बार चुदी.. हाँ, लेकिन यह याद था कि रशीद ने मुझे बिल्कुल नए अंदाज़ में चोदा था और उसने मुझे घोड़ी बनाकर लंड पीछे से चूत में डाला था और मेरी जामकर चुदाई की थी.
में नीचे आकर सो गई और सुबह 8 बजे मेरी आँख खुली. तो मैंने जल्दी जल्दी अपने छोटे भाई को नाश्ता बनाकर दिया और वो स्कूल चल गया और तब तक मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था.. लेकिन में शरीर में भरी हुई एक नई उमंग को महसूस कर रही थी.
दोस्तों फिर तभी दरवाजे पर घंटी बजी और मैंने दरवाजा खोला.. देखा तो अमित बाहर खड़ा हुआ था और में मुस्कुराकर दरवाजा खुला ही छोड़कर अंदर चली आई और सोफे पर बैठ गई. तो अमित भी मुस्कुराता हुआ आया और मेरे पास बैठ गया.. उसने मुझे बड़े प्यार से देखा और मैंने भी उसे मुस्कुराकर देखा. दोस्तों में उस समय सिर्फ़ टी-शर्ट और स्कर्ट पहने हुए थी और मैंने उसके अंदर पेंटी और ब्रा नहीं पहनी थी.. क्योंकि मुझे मालूम था कि यह लोग ज़रूर आएँगे तो ब्रा और पेंटी का क्या काम?
फिर में वैसे ही बैठी रही और मैंने अमित से कहा.. यार वो कल वाली फिल्म मुझे दोगे.. मुझे उसे पूरी देखना है. तो वो बोला कि देखने की क्या ज़रूरत है हम बना लेते है.. तुम हिरोइन बनना और हम सब लोग हीरो बन जाएगे.. अरे यार मज़ाक मत करो मुझे वो देखना है कि वो किस किस तरीके से चुदवाती है.
हाँ ठीक है राय दे दूंगा और यह कहते ही उसने अपना उल्टा हाथ मेरी गर्दन के पीछे से मेरे कंधे पर रखा और सोफे पर मुझसे चिपककर बैठ गया. मुझे अब अमित से बिल्कुल भी शरम नहीं आ रही थी और फिर मैंने टीवी चालू कर दिया और फिल्म देखने लगी.
अब अमित ने मेरी टी-शर्ट के ऊपर से ही मेरे बूब्स के निप्पल को छुआ और मेरे शरीर में आनंद भर गया. मैंने उसको मुड़कर देखा और उसने मुस्कुराते हुए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और मैंने भी उसको किस कर लिया.. लेकिन वो मुझसे लंबा किस चाह रहा था..
तो मैंने उसके होंठो पर एक लंबा किस किया और उसने इतनी देर में अपना एक हाथ मेरी टीशर्ट के अंदर डाल दिया और मेरे बूब्स को छूने लगा, दबाने लगा और धीरे धीरे मेरी आँखें बंद होने लगी और में भी उसको इधर उधर छूने लगी और उसके बालों में हाथ फिराने लगी. फिर उसने अपने एक हाथ को मेरी स्कर्ट में डाल दिया और मेरी जांघो को छूते ही मेरी चूत तक जा पहुँचा और वो मेरी चूत को छूते ही बोला. अरे यार तुमने पेंटी क्यों नहीं पहनी है?
तो मैंने कहा कि मैंने अब पेंटी पहनना छोड़ दिया है. वो बोला कि बहुत अच्छा है.. अब तुम जब चाहो चुदवा सकती हो. तो मैंने कहा कि हाँ और क्या पेंटी में मुझे बहुत बुरा लगता है और अब वो मुझे फिर से चूमने लगा.. मेरी गर्दन पर, गालों पर, मेरे होंठो पर, मैंने अमित से कहा कि अमित प्लीज दरवाजा बंद कर लो.. वरना कोई आ जाएगा.
तो अमित ने दरवाजा बंद किया और फिर से हम दोनों एक दूसरे की बाहों में समा गए.. उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और फिर मेरी स्कर्ट मैंने खुद ही उतार दी और अब में फिर से एकदम नंगी अमित के सामने थी.. वो मुझे प्यार किए जा रहा था और मेरे बूब्स को चूसकर मेरे बदन पर सिर्फ़ अपने चुंबन ही चुंबन कर रहा था

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